सस्ते घर वाली योजना ‘लाइट हाउस प्रोजेक्ट्स’ के बारे में यहां जानिये सब कुछ

Published on Economic Times on 6 Jan 2021

केन्द्र सरकार ने हाल ही में छह राज्यों में लाइट हाउस प्रोजेक्ट (LHP) की नींव रखी थी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस योजना की शुरुआत की थी. इसके तहत पीएम ने अगरतला (त्रिपुरा), रांची (झारखंड), लखनऊ (उत्तर प्रदेश), इंदौर (मध्य प्रदेश), राजकोट (गुजरात) और चेन्नई (तमिलनाडु) में लाइट हाउस प्रोजेक्ट्स की आधारशिला रखी. योजना के मुताबिक हर शहर में इस तरह के एक हजार आवासों का निर्माण किया जाना है. इन्हें एक साल के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. लाइट हाउस प्रोजेक्ट

क्या है यह योजना?

लाइट हाउस प्रोजेक्ट केंद्रीय शहरी मंत्रालय की महत्वाकांक्षी योजना है, जिसके तहत लोगों को स्थानीय जलवायु और इकोलॉजी का ध्यान रखते हुए टिकाऊ आवास प्रदान किए जाते हैं. लाइट हाउस प्रोजेक्ट के लिए जिन राज्यों को चुना गया है, उनमें त्रिपुरा, झारखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात और तमिलनाडु शामिल हैं.

इस प्रोजेक्ट में खास तकनीक का इस्तेमाल कर सस्ते और मजबूत मकान बनाए जाते हैं. इस प्रोजेक्ट में फैक्टरी से ही बीम-कॉलम और पैनल तैयार कर घर बनाने के स्थान पर लाया जाता है, इसका फायदा ये होता है कि निर्माण की अवधि और लागत कम हो जाती है. इसलिए प्रोजेक्ट में खर्च कम आता है. इस प्रोजेक्ट के तहत बने मकान पूरी तरह से भूकंपरोधी होंगे |

फ्लैट का कितना है एरिया
इस प्रोजेक्ट के तहत पूरा कारपेट एरिया 34.50 वर्ग मीटर में होगा. इसके तहत 14 मंजिला टावर बनाए जाएंगे. कुल 1,040 फ्लैट तैयार होंगे, हर फ्लैट 415 वर्ग फुट का होगा. जानकारी के मुताबिक, घरों की कीमत 12.59 लाख रुपये है, जिसमें केंद्र और प्रदेश सरकार की तरफ से 7.83 लाख रुपये अनुदान के तौर पर दिए जाएंगे. बाकी 4.76 लाख रुपये लाभार्थियों को देने होंगे. फ्लैट का आवंटन प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अनुसार होगा.

नई टेक्नोलॉजी से हो रहा घरों का निर्माण

इस मौके पर मोदी ने कहा कि लाइट हाउस प्रोजेक्ट्स में सबसे बेहतरीन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जा रहा है और इस परियोजना से अर्बन हाउसिंग की जरूरतें पूरी होंगी. उन्होंने कहा कि इस परियोजना पर हर देशवासी को गर्व होगा कि विकास को गति देने के लिए हाई-एंड टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जा रहा है. रांची में जर्मनी के 3डी कंस्ट्रक्शन सिस्टम्स का इस्तेमाल किया जा रहा है. इसी तरह अगरतला में न्यूजीलैंड की स्टील फ्रेम टेक्नोलॉजी का प्रयोग हो रहा है. लखनऊ में कनाडा की टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल हो रहा है. 

कब तक पूरा होगा प्रोजेक्ट? 

नई तकनीक के प्रयोग के कारण निर्माण कार्य करीब एक साल में पूरा हो सकेगा. प्री फैब्रिकेटेड चीजों के प्रयोग से निर्माण ज्यादा टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल होगा. लखनऊ में प्रोजेक्ट को लेकर यूपी के नगर विकास मंत्री आशुतोष टंडन ने बताया कि प्रॉजेक्ट का क्रियान्वयन शहीद पथ स्थित अवध विहार योजना में किया जा रहा है. केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय ने 2017 में GHTC-इंडिया के तहत लाइट हाउस प्रोजेक्ट के लिए छह स्थानों को चुनने के लिए राज्यों व केन्द्रशासित प्रदेशों को कहा था. मंत्रालय ने इसमें सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों को प्रोत्साहित किया था. मानकों के मुताबिक, सबसे अधिक मार्क्स पाने वाले 6 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में लाइट हाउस प्रोजेक्ट की शुरुआत करने की घोषणा की गई थी.